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Life of the CA student?

A poem dedicated to all CA students ?

एक मामूली सा CA हूँ, बेशक कोई भगवान नही
CA का CA होना मगर इतना भी आसान नही

इस दर्जे की खातिर मैने बचपन अपना खोया है
मैं वो हूँ जो स्कूल में 0.5 मार्क्स को रोया है

सुकुन की जिंदगी को कुर्बान करता CA
कभी किताब तो कभी स्टडी टेबल पे सोया है

जाने कब होली बीती, जाने कब दिवाली गई
जाने कितने रक्षाबंधन, मेरी कलाई खाली गई

परीक्षाओं की लड़ी ने साथ नही छोड़ा अब तक
मेरे हज़ारों दिन खा गई, उतनी ही रातें काली गई

फिर भी तुम्हें हर वक्त जो खुश दिखे परेशान नही
उस CA का CA होना इतना भी आसान नहीं।

मैनें क्रिकेट का बैट छोड़ा, टीवी का रिमोट छोड़ा
इस दर्जे की खातिर मैने जिंदगी की खुशियों को छोड़ा

मेरा कोई संडे नही, छुट्टी की गुज़ारिश नही
सर्दी का कोहरा या पहली वाली बारिश नही

मेरा परिवार मुझसे बात करने को तरसता है
लेकिन कभी पूरी होती उनकी ख्वाहिश नही

अपने ऊपर गर्व है मुझे, लेकिन कोई गुमान नही
CA का CA होना इतना भी आसान नही

जाने कितने लोग हमने सरकार से बचा दिए
जाने कितने टैक्स हमने लोगों के बचा दिए

तुम्हारी उम्मीदों पर खरा उतरने की खातिर
हमने अपनी ज़िंदगी के तीस साल लगा दिए

फिर भी मेरे पास आने से डरते हैं लोग
ज़रा कुछ लिख दूं तो फिर शक करते हैं लोग

मेरी मेहनत को वो पेन घिसना समझते हैं
फीस के नाम से ठंडी आहें भरते हैं लोग

तुम भी तो मेरी इस हालत से अनजान नही
CA का CA होना इतना भी आसान नहीं।

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Gazals Poetry

સ્નેહ-ઔષધ

તું ધરે જે વ્હાલથી એ ઝીલવાનું જોર છે
ઝેર ઘટકાવ્યા પછીયે જીવવાનું જોર છે

મેં કદી પકડયાં નથી આ સોયદોરા હાથમાં,
તોય દુનિયાના અધરને સીવવાનું જોર છે

જખ્મ અંતરના બધા છે જાગવાની રાહ પર,
‘સ્નેહ-ઔષધ’ ની અસર પૂરી થવાનું જોર છે

હું ડરું છું દાન ખોટા હાથમાં ચાલ્યું જશે!
આમ આખી જાતને પણ દઇ જવાનું જોર છે

રામ જેવો થઇ ગયો છે તો તુ બેસી જા ખભે,
આ જિગર હનુમંત થઇને ચીરવાનું જોર છે

જ્યાં તમે ભોંઠા પડો છો ડૂબવાના ખ્યાલ માં,
એ લહેર પણ ઉતરીને જીતવાનું જોર છે.

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